Saturday, 5 December 2015

Vakt

कल  की  जड़ों से जुड़ा हुआ
कल की शाख़ों तक बढ़ा हुआ
आज के मज़बूत तने पर खड़ा हुआ
उम्मीद के फूलों से महका हुआ
एक दरख़्त है
यही वक़्त है



सुनीताशर्मादुबे
15 अगस्त 2013 

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