कल की जड़ों से जुड़ा हुआ
कल की शाख़ों तक बढ़ा हुआ
आज के मज़बूत तने पर खड़ा हुआ
उम्मीद के फूलों से महका हुआ
एक दरख़्त है
यही वक़्त है
सुनीताशर्मादुबे
15 अगस्त 2013
कल की शाख़ों तक बढ़ा हुआ
आज के मज़बूत तने पर खड़ा हुआ
उम्मीद के फूलों से महका हुआ
एक दरख़्त है
यही वक़्त है
सुनीताशर्मादुबे
15 अगस्त 2013
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