Wednesday, 4 July 2018

 मेरा वजूद इक किताब है
 महकती हैं तुम्हारी यादें आज भी,
 जिसमें रखे हुए फूलों की तरह
 रखकर कहीं भूल गए हो तुम जिसे 
 ज़माना गुज़र गया पन्नों को पलटे
 क्यों नहीं पढ़ते हर सफहा फिर एक बार तुम....


 सुनीताशर्मादुबे
26-04-2018


No comments:

Post a Comment