मेरा वजूद इक किताब है
महकती हैं तुम्हारी यादें आज भी,
जिसमें रखे हुए फूलों की तरह
रखकर कहीं भूल गए हो तुम जिसे
महकती हैं तुम्हारी यादें आज भी,
जिसमें रखे हुए फूलों की तरह
रखकर कहीं भूल गए हो तुम जिसे
ज़माना गुज़र गया पन्नों को पलटे
क्यों नहीं पढ़ते हर सफहा फिर एक बार तुम....
सुनीताशर्मादुबे
26-04-2018
क्यों नहीं पढ़ते हर सफहा फिर एक बार तुम....
सुनीताशर्मादुबे
26-04-2018
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