मन मेरा एक अकेला पाखी
वक्त की डाल पर बैठा सोचता है
आज मैं जहाँ बैठा हूँ क्या वही
डाल कल भी मुझे आसरा देगी
या टूट कर अलग हो जाएगी अपने पेड़ से
क्या मुझे कोई और बसेरा मिलेगा या मैं
भी बिछुड़ जाऊँगा मेरे अपनों से। ...
सुनीताशर्मादुबे
वक्त की डाल पर बैठा सोचता है
आज मैं जहाँ बैठा हूँ क्या वही
डाल कल भी मुझे आसरा देगी
या टूट कर अलग हो जाएगी अपने पेड़ से
क्या मुझे कोई और बसेरा मिलेगा या मैं
भी बिछुड़ जाऊँगा मेरे अपनों से। ...
सुनीताशर्मादुबे
No comments:
Post a Comment