Monday, 23 January 2017

मन मेरा एक अकेला पाखी
वक्त की डाल पर बैठा सोचता है
आज मैं जहाँ बैठा हूँ क्या वही
डाल कल भी मुझे आसरा देगी
या टूट कर अलग हो जाएगी अपने पेड़ से
क्या मुझे कोई और बसेरा मिलेगा या मैं
भी बिछुड़ जाऊँगा मेरे अपनों से। ...



सुनीताशर्मादुबे

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